healing words

शब्दों की शक्ति से मोन की ओर

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  • How do you celebrate holidays?I spend my holidays exploring the different colors hidden within me.

  • purity of mind Eyes we have,yet we see onlywhat the mind desires. The mind desiresonly what the veilof karma’s fruit reveals. Perform noble deeds,and through their light,purify the veil of illusion. आंखे है,पर दिखता वही है जो मन चाहता है।मन वही चाहता है जो कर्म फल का पर्दा दिखाता है।सत्कर्म करके इस माया के पर्दे…

  • तुम आए —जैसे कोई मौन संकेत,कोई अदृश्य इशाराजो आत्मा को उसकी दिशा दिखा दे। मैं डूबा थाइस संसार की गहराइयों में,माया के रंगों में उलझा,भटकता रहा अपनी ही छाया में। तुम नाव बनकर आए,शब्द नहीं बोले,पर तुम्हारी उपस्थिति हीमुझे कृष्ण के चरणों तक ले गई। तुम आए —जैसे कोई मधुर स्पर्श,जो नाम रस की ओर…

  • अमृत बरस भी जाए,  गगन से,  देवताओं की कृपा बनकर,  शिव की मुस्कान में घुलकर—  तो भी क्या तुम  अपने भीतर के विष से  मुक्त हो पाओगे? तुम्हारे स्पर्श में  अब भी छाया है ग्रहण,  राहु की छाया,  केतु की चाल,  जो हर उजाले को  अपवित्र कर देती है। तुमने किसी के मन को  मैला…

  • अंतिम क्या है—  एक क्षण?  एक शून्य?  या वह मौन जो सब कुछ कह जाता है? जब वह आता है,  कोई दरवाज़ा नहीं बंद होता,  बल्कि एक खिड़की खुलती है  जिससे जीवन फिर से झाँकता है। अंतिम के स्पर्श में  पुरानी पीड़ा भी  एक नई दृष्टि बन जाती है। कोई संदेश नहीं,  केवल एक कंपन, …

  • Share a lesson you wish you had learned earlier in life. Had I learnt that lesson of zero, I would have attained the truth in my childhood itself and would have flown in the stream of happiness.

  • What are your favorite types of foods? Pure Vaishnav food

  • हर सुबह लाती है संदेश, बहने का — सहज, शुद्ध, मौन में। देखने का — भीतर की दृष्टि से। चलने का — सत्य के संग, पग-पग नर्म। फिर एक बार उठो, सही के साथ चलो, दिन को सही आकार दो। तरीके हों प्रेम से भरे, और अंत हो सुकून की नींद से। किंतु प्रिय, हर…

  • How often do you walk or run? The body moves and the mind runs, but when the body stops the mind runs.

  • द्वैत को द्वैत कौन बना कर रखता है?दो मन हो सकते हैं, विचारधारा दो मनो को एक होने से रोकती है।दो बुद्धि हो सकती है , अज्ञान दो बुद्धि को एकरस होने से रोकती है।दो शरीर हो सकते हैं, परिस्थितियों के कारण शरीर अनुकूल रहने के लिए भिन्न है।दो गुण हो सकते हैं , दो…