healing words

शब्दों की शक्ति से मोन की ओर

जो प्रेमी हैं, 
वे शांति के द्वार खोलते हैं— 
न कोई मांग, 
न कोई शर्त, 
बस समर्पण की मौन भाषा में 
वे ब्रह्म की सांस लेते हैं।

जो प्रेम को भूल जाते हैं, 
वे सुख की चकाचौंध में खो जाते हैं— 
हँसी होती है, 
पर भीतर कोई गूंज नहीं। 
संसार की रंगीनियाँ 
क्षणिक हैं, 
जैसे जल पर उगती धूप।

प्रेमी जल में उतरते हैं, 
और शांति की गहराई छूते हैं। 
विरह में भी उन्हें संगीत मिलता है, 
और मिलन में मौन।

सुख में रमने वाले 
भीड़ में अकेले होते हैं, 
प्रेम में डूबे हुए 
अकेले में पूर्ण।

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